इस्राईल इन दिनों अपने इतिहास के सबसे गंभीर घरेलू संकट से घिरा हुआ है।
अवैध राष्ट्र इस्राईल में पिछले काफी समय से जारी संकट गंभीर रूप लेता नज़र आ रहा है।
इस्राईली सांसदों ने कड़े विरोध के बावजूद न्यायिक सुधार से जुड़े विवादित विधेयक को पास कर दिया है।
इसके क़ानून बनने से अब सुप्रीम कोर्ट के पास मौजूदा सरकार के फ़ैसलों को पलटने की शक्ति ख़त्म हो जाएगी।
बता दें कि इस साल की शुरुआत से ही हर सप्ताह सरकार की न्यायिक सुधार योजना के ख़िलाफ़ इस्राईल की जनता विरोध प्रदर्शन कर रही है।
धीरे-धीरे ये प्रदर्शन बढ़ते रहे और अब देश भर के बड़े शहरों और कस्बों की सड़कों पर लाखों लोगों का हुजूम है।
इससे बेपरवाह सरकार ने सोमवार को न्यायिक सुधार विधेयक को क़ानून के तौर पर पारित कर दिया। इस कानून के ज़रिए देश में सुप्रीम कोर्ट से सरकारी फैसलों को रद्द करने की शक्ति को अतार्किक बताते हुए ख़त्म कर दिया गया है।
प्रदर्शनकारी सभी सुधारों को वापस लेने और प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों को नेतन्याहू के राजनीतिक विरोधियों के साथ ही इस्राईली सेना, खुफ़िया एजेंसियों और सिक्यॉरिटी सर्विसेज़ के पूर्व शीर्ष अधिकारियों, पूर्व प्रधान न्यायाधीशों और नामी-गिरामी क़ानूनविदों का समर्थन मिल रहा है।